नई दिल्ली, 21 अगस्त |“वोट चोर, गद्दी छोड़!” – जैसे ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद भवन में दाखिल हुए, विपक्षी सांसदों के नारे गूंज उठे। मानसून सत्र 2025 का आखिरी दिन हंगामे और तीखी नोकझोंक के साथ खत्म हुआ।
वोट चोर, गद्दी छोड़: संसद में हंगामे की पूरी कहानी
संसद का मानसून सत्र, जो 21 जुलाई से शुरू हुआ और 21 अगस्त 2025 को समाप्त हुआ, पूरी तरह से विपक्ष के विरोध प्रदर्शन और “वोट चोर, गद्दी छोड़” नारों की भेंट चढ़ गया। इस सत्र में कुल 21 बैठकें हुईं, लेकिन लोकसभा में निर्धारित 120 घंटों में से केवल 37 घंटे ही चर्चा हो सकी। राज्यसभा में भी हाल बेहतर नहीं था, जहां 41 घंटे ही चर्चा हो पाई। विपक्ष ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित “वोट चोरी” के मुद्दे पर सरकार को घेरने की हरसंभव कोशिश की।
सत्र की शुरुआत से ही हंगामा
मानसून सत्र की शुरुआत से ही माहौल गर्म था। पहले दिन, 21 जुलाई को, विपक्ष ने पहलगाम आतंकी हमले, ऑपरेशन सिंदूर, और बिहार में SIR जैसे मुद्दों पर चर्चा की मांग की। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि उन्हें और अन्य विपक्षी सांसदों को बोलने का मौका नहीं दिया जा रहा, जबकि सत्तापक्ष के नेताओं को खुलकर बोलने की छूट थी। उन्होंने कहा, “यह लोकतंत्र की परंपरा के खिलाफ है। अगर सरकार बोल सकती है, तो विपक्ष को भी बोलने का हक मिलना चाहिए।”
विपक्षी दलों, खासकर इंडिया गठबंधन, ने SIR को लेकर सबसे ज्यादा हंगामा किया। उनका आरोप था कि बिहार में मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ हुई है, जिससे लाखों लोगों के वोटिंग अधिकार छीने गए। समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने संसद परिसर में प्रिंटेड रसीदें दिखाकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए।
“वोट चोर, गद्दी छोड़” का गूंजा नारा
सत्र के आखिरी दिन, 21 अगस्त को, जब प्रधानमंत्री मोदी लोकसभा में पहुंचे, विपक्षी सांसदों ने “वोट चोर, गद्दी छोड़” के नारे लगाकर उनका स्वागत किया। यह नारा इतना जोरदार था कि लोकसभा की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी। विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में बैनर लहराए, जिन पर “डिस्कशन नॉट डिलीशन” लिखा था। उनका कहना था कि सरकार SIR और वोट चोरी के मुद्दे पर चर्चा से भाग रही है।
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने विपक्ष के इस रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, “संसद की गरिमा बनाए रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। इस तरह के नारे और हंगामा देश के सबसे बड़े लोकतंत्र को कमजोर करते हैं।” लेकिन विपक्ष का हंगामा थमने का नाम नहीं लिया।
क्या रहा सत्र का सबसे बड़ा मुद्दा?
इस सत्र में सबसे ज्यादा चर्चा में रहा संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, जो गिरफ्तार प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, और मंत्रियों को हटाने से संबंधित था। इस बिल को संसद की संयुक्त समिति (JPC) को भेजने का प्रस्ताव पारित हुआ। विपक्ष ने इसे “सत्ता चोरी” का हथियार बताते हुए सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कहा, “चुनाव आयोग के जरिए वोट चोरी हो रही है, और इस बिल के जरिए सरकार सत्ता चोरी की कोशिश कर रही है।”
इसके अलावा, ऑपरेशन सिंदूर पर भी लंबी चर्चा हुई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस ऑपरेशन की सफलता को रेखांकित किया, जबकि विपक्ष ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के युद्धविराम दावों पर सवाल उठाए। राहुल गांधी ने कहा, “अगर PM मोदी में इंदिरा गांधी का आधा साहस भी होता, तो वे ट्रंप के दावों का खुलकर जवाब देते।”
कितना काम हुआ, कितना बचा?
सत्र के दौरान लोकसभा में 12 और राज्यसभा में 15 विधेयक पारित हुए। इनमें आयकर विधेयक 2025, राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक, और भारतीय बंदरगाह विधेयक जैसे अहम बिल शामिल थे। हालांकि, विपक्ष के लगातार हंगामे के कारण कई विधेयकों पर चर्चा नहीं हो सकी। संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने निराशा जताते हुए कहा, “हमने विपक्ष को हर मुद्दे पर चर्चा का मौका दिया, लेकिन वे हंगामे में व्यस्त रहे। जनता के हित में बिल पास करना हमारी जिम्मेदारी थी, और हमने वह किया।”
लोकसभा में केवल 55 तारांकित सवालों के जवाब दिए जा सके, जो कुल 419 सवालों का महज 13% है। यह इस सत्र की कम उत्पादकता को दर्शाता है।
विपक्ष की रणनीति और सरकार का जवाब
विपक्ष ने SIR के मुद्दे पर संसद के बाहर भी प्रदर्शन किया। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, और अखिलेश यादव जैसे नेताओं ने संसद परिसर से चुनाव आयोग तक मार्च निकाला। उनका कहना था कि यह “लोकतंत्र पर हमला” है। दूसरी ओर, सरकार ने इसे कोर्ट में विचाराधीन मामला बताकर चर्चा से इनकार किया।
आगे क्या?
संसद का मानसून सत्र भले ही खत्म हो गया, लेकिन “वोट चोर, गद्दी छोड़” का नारा अब सड़कों पर गूंज सकता है। विपक्ष ने साफ कर दिया है कि वे SIR और वोट चोरी के मुद्दे को 2024 के आम चुनाव तक उठाते रहेंगे। दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि वह हर सवाल का जवाब देने को तैयार है, बशर्ते विपक्ष चर्चा के लिए तैयार हो।
क्या यह हंगामा लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक है या संसद की गरिमा को ठेस पहुंचा रहा है? अपनी राय हमें कमेंट में जरूर बताएं। और ऐसी ही ब्रेकिंग खबरों के लिए स्मार्टख़बरी न्यूज पोर्टल को फॉलो करें!