वैष्णो देवी त्रासदी: मौसम विभाग की चेतावनी के बावजूद श्राइन बोर्ड ने नहीं रोकी यात्रा, 35 लोगों की मौत का सवाल
“मौसम विभाग की क्लियर एडवाइजरी थी, फिर भी श्राइन बोर्ड ने यात्रा नहीं रोकी। अगर बोर्ड एडवाइजरी मान लेता, तो इतने लोग नहीं मरते!” – ये आवाज है कटरा की पुष्पांजलि पंचायत के बलदेव ठाकुर की, जो खुद इस भीषण हादसे के गवाह हैं।
26 अगस्त की वो काली दोपहर जब वैष्णो देवी मंदिर के पुराने ट्रैक पर अर्धकुंवारी के पास लैंडस्लाइड ने 35 मासूमों की जान ले ली। आज सवाल ये है कि जब मौसम विभाग ने पहले ही भारी बारिश और लैंडस्लाइड की चेतावनी जारी कर दी थी, तो श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने यात्रा क्यों नहीं रोकी?
⚠️ क्या थी मौसम विभाग की चेतावनी?
रेड अलर्ट के बाद भी नहीं रुकी यात्रा
मौसम विभाग ने 25 और 26 अगस्त के लिए जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश, बादल फटने और लैंडस्लाइड का अलर्ट जारी किया था। अगले 7 दिनों तक भारी बारिश की चेतावनी दी गई थी। लोगों को सलाह दी गई थी कि वे तेज बारिश के दौरान घरों में रहें, पेड़ों के नीचे छिपने से बचें और गैरजरूरी यात्रा न करें।
इस चेतावनी के बाद जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने स्कूल, कॉलेज और शैक्षणिक संस्थान बंद कर दिए थे। लेकिन हैरानी की बात ये है कि वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड लापरवाही बरतते हुए यात्रा जारी रखा।
🗣️ स्थानीय लोगों का गुस्सा
“बोर्ड किसी की नहीं सुनता”
बलदेव ठाकुर, जो इस हादसे के वक्त मौजूद थे, बताते हैं: “ये हादसा हमारी पंचायत में हुआ है। मैं उस वक्त वहीं था। हम घायलों को डिस्पेंसरी ले गए और उनका इलाज कराया। मौसम विभाग ने कहा था कि बारिश होगी, लेकिन श्राइन बोर्ड किसी की बात नहीं मानता।”
वे आगे कहते हैं: “उन्होंने सारे पहाड़ छलनी कर दिए हैं। कुछ दिन पहले वैष्णो देवी की गुफा के नीचे बड़ा पत्थर गिरा था। इन्होंने किसी को नहीं बताया। बाणगंगा में यात्री मरे, एक लोकल आदमी मरा। वे कोई एडवाइजरी नहीं मानते।”
🏛️ विधायक ने उठाए सवाल
“प्रशासन और श्राइन बोर्ड की भूल”
श्री माता वैष्णो देवी (रियासी) सीट से विधायक बलदेव राज शर्मा भी श्राइन बोर्ड पर सवाल उठाते हैं। वे कहते हैं: “रेड अलर्ट की एडवाइजरी तो सभी के लिए जारी की गई थी। सरकार भी कह रही थी। ये प्रशासन और श्राइन बोर्ड की भूल है। इस भूल का नतीजा ये निकला है।”
विधायक ने बताया: “हमने पूछा कि यात्रा बंद थी, तो आपने लोगों को जाने क्यों दिया। इस पर उनका जवाब था कि लोग नीचे से ऊपर नहीं गए, ये तो वापस आने वाले लोग थे। यात्रा बंद करने की वजह से उन्हें रोका गया था। इसलिए एक जगह इतने लोग जमा थे।”
👁️🗨️ हादसे की आंखों देखी घटना
“अचानक शोर मचा- भागो, भागो!”
हादसे के वक्त मौजूद शिवम, जो उत्तर प्रदेश से आए थे, बताते हैं: “दोपहर का वक्त था। हम माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए सीढ़ियां चढ़ रहे थे। अचानक शोर मचा- भागो, भागो। लोग डर गए और भागने लगे। तभी अर्धकुंवारी के पास पहाड़ से मलबा आने लगा। 40 से 50 लोग उसमें दब गए।”
शिवम के भाई, भाभी और भतीजा अभी भी लापता हैं। वे कहते हैं: “हम बहुत परेशान हैं। तीनों का कहीं से पता नहीं चल रहा है। अगर वे जिंदा लोगों में नहीं हैं, मरने वालों में नहीं हैं, तो फिर कहां गए?”
🚨 मुख्यमंत्री ने उठाए सवाल
“चेतावनी मिलने के बाद क्यों नहीं रोके गए यात्री?”
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी सवाल उठाया है: “जब आपदा की चेतावनी दी गई थी, तब अधिकारियों ने तीर्थयात्रियों को क्यों नहीं रोका? हमें मौसम के बारे में पता था, तो क्या हमें उन लोगों की जान बचाने के लिए कुछ कदम नहीं उठाने चाहिए थे?”
उन्होंने कहा: “हमें कुछ दिन पहले ही मौसम की चेतावनी मिल गई थी। फिर ये लोग ट्रैक पर क्यों थे, उन्हें क्यों नहीं रोका गया, सुरक्षित जगह पर क्यों नहीं पहुंचाया गया। इस पर बाद में बात करनी होगी।”
📊 वैष्णो देवी त्रासदी: एक नजर में
आंकड़े विवरण
मृतकों की संख्या =35
घायलों की संख्या =20+
लापता लोग =कई
हादसे का स्थान =अर्धकुंवारी के पास
हादसे का समय =26 अगस्त, दोपहर 3 बजे
मौसम चेतावनी =25-26 अगस्त के लिए रेड अलर्ट
🔍 जिम्मेदारी तय करने की मांग
“श्राइन बोर्ड को जवाबदेह ठहराया जाए”
बलदेव ठाकुर मांग करते हैं: “कड़ी सुरक्षा जांच, टोल और निगरानी का सिस्टम होना चाहिए, ताकि यह तय हो सके कि एक बार में कितने यात्रियों को जाने की इजाजत है। इस लापरवाही के लिए श्राइन बोर्ड को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उनके खिलाफ कार्रवाई होने तक हम आवाज उठाते रहेंगे।”
🏨 यात्रियों के लिए राहत
होटल एसोसिएशन ने की मुफ्त रहने की पेशकश
हादसे के बाद श्राइन बोर्ड ने वैष्णो देवी यात्रा रोक दी है, जिससे कई श्रद्धालु कटरा में फंस गए हैं। कटरा होटल एसोसिएशन ने ऐलान किया है कि फंसे तीर्थयात्रियों और जरूरतमंद लोगों को फ्री में रहने की जगह दी जाएगी।
एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश वजीर ने कहा: “सभी जरूरतमंदों को 2-4 दिनों के लिए या जब तक उन्हें जरूरत हो, रहने के लिए जगह देने का फैसला लिया गया है।”
🌧️ जम्मू-कश्मीर में मौसम की स्थिति
बाढ़ और लैंडस्लाइड से जारी है संकट
भारी बारिश की वजह से जम्मू में तवी नदी में बाढ़ आ गई है। कई घरों और दुकानों को नुकसान पहुंचा है। उधमपुर-रामबन में भारी बारिश और लैंडस्लाइड की वजह से जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे लगातार तीन दिन से बंद है।
स्थानीय निवासी विकास बताते हैं: “लो लाइन एरिया में हालात ज्यादा खराब हैं। कठुआ और सांबा ज्यादा प्रभावित हैं। माता वैष्णो देवी वाले रूट पर काफी नुकसान हुआ है।”
📢 सवाल ज्यादा, जवाब कम
वैष्णो देवी त्रासदी ने प्रशासनिक लापरवाही के गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जब पूरे जम्मू-कश्मीर में स्कूल-कॉलेज बंद थे और मौसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी किया था, तो श्राइन बोर्ड ने यात्रा क्यों जारी रखी? क्यों नहीं सीखा गया पहले के हादसों से?
अब जरूरत है कि इस घटना की निष्पक्ष जांच हो और वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाए। ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी न दोहराई जा सके।
⚠️ डिस्क्लेमर: यह खबर स्थानीय निवासियों, पीड़ित परिवारों और सरकारी अधिकारियों के बयानों पर आधारित है। श्राइन बोर्ड के अधिकारियों से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन उनका फोन अनरीचेबल आया।