व्हाइट हाउस में सनसनीखेज बयान: ट्रम्प ने कहा- ‘टैरिफ ने रोके 4 युद्ध’, भारत पर अतिरिक्त टैरिफ से बढ़ेगा आर्थिक दबाव
“मैंने सात युद्ध रोके जो चल रहे थे, जिनमें भारत और पाकिस्तान भी शामिल थे। वे हर जगह जेट मार गिरा रहे थे।” – डोनाल्ड ट्रम्प, अमेरिकी राष्ट्रपति
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को एक ऐसा बयान दिया है जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में तूफान ला दिया है। साउथ कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग के साथ व्हाइट हाउस में हुई द्विपक्षीय बैठक के दौरान ट्रम्प ने दावा किया कि उन्होंने दुनियाभर में सात संघर्षों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिनमें से चार युद्ध टैरिफ की रणनीति से रोके गए। इनमें भारत और पाकिस्तान के बीच का तनावपूर्ण संघर्ष भी शामिल है, जिसके बारे में उन्होंने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि यह न्यूक्लियर वॉर में तब्दील होने के करीब था .
भारत-पाकिसतान जंग के बारे में ट्रम्प के चौंकाने वाले दावे
ट्रम्प ने अपने बयान में कहा, “मैंने सात युद्ध रोके जो चल रहे थे, जिनमें भारत और पाकिस्तान भी शामिल थे। वे हर जगह जेट मार गिरा रहे थे।” उन्होंने इस संघर्ष के दौरान 7 फाइटर जेट गिराए जाने का भी दावा किया, जो उनके पिछले दावे (19 जुलाई को 5 जेट) से भी ज्यादा है। हालांकि, उन्होंने इस बार भी स्पष्ट नहीं किया कि ये जेट किस देश के थे और ऐसा कब हुआ।
अंतरराष्ट्रीय संबंधों के जानकारों के अनुसार, ट्रम्प संभवतः 2019 के बालाकोट एयर स्ट्राइक और उसके बाद की घटनाओं की ओर इशारा कर रहे हैं, जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर था और अमेरिका ने बीच-बचाव कर दोनों देशों को शांत रहने की अपील की थी।
टैरिफ की रणनीति: अमेरिका का हथियार बना व्यापारिक दबाव
ट्रम्प ने अपनी सफलता का श्रेय टैरिफ नीति को दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ट्रिलियन डॉलर की कमाई टैरिफ से की और इसी रणनीति से युद्ध भी रोके। यह बयान उस समय आया है जब ट्रम्प प्रशासन ने भारत पर रूसी तेल खरीदने की वजह से 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया है, जो 27 अगस्त से लागू होगा .
भारत पर टैरिफ: अमेरिकी रणनीति का अहम हिस्सा
ट्रम्प से पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने एनबीसी न्यूज के कार्यक्रम ‘मीट द प्रेस’ में स्पष्ट किया था कि भारत पर लगाए गए सेकेंडरी टैरिफ वाशिंगटन की उसी रणनीति का हिस्सा हैं। वेंस ने कहा, “ट्रम्प प्रशासन भारत पर टैरिफ लगाने सहित दूसरे उपायों के जरिए रूस के लिए अपनी तेल अर्थव्यवस्था से लाभ कमाना कठिन बना रहा है” .
वेंस ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका के पास अभी भी ‘बहुत सारे पत्ते खेलने बाकी हैं’ और ट्रम्प प्रशासन ने पहले ही पिछली सरकारों की तुलना में रूस पर ज्यादा आर्थिक दबाव डाला है।
रूसी तेल खरीद: भारत की बढ़ती निर्भरता और अमेरिकी चिंताएं
आंकड़े बताते हैं कि भारत, चीन के बाद रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया है। यूक्रेन युद्ध से पहले भारत रूस से सिर्फ 0.2% (68 हजार बैरल प्रतिदिन) तेल आयात करता था। मई 2023 तक यह बढ़कर 45% (20 लाख बैरल प्रतिदिन) हो गया, जबकि 2025 में जनवरी से जुलाई तक भारत हर दिन रूस से 17.8 लाख बैरल तेल खरीद रहा है।
पिछले दो साल से भारत हर साल 130 अरब डॉलर (11.33 लाख करोड़ रुपए) से ज्यादा का रूसी तेल खरीद रहा है, जिसने अमेरिका की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
मुनाफाखोरी के आरोप और भारत का पक्ष
ट्रम्प के ट्रेड एडवाइजर पीटर नवारो ने भारत पर रूस से तेल खरीदकर मुनाफाखोरी का आरोप लगाया था। नवारो ने कहा था, “भारत सस्ते दाम पर रूस से कच्चा तेल खरीद रहा है, इंडियन कंपनियां उसे रिफाइन कर महंगे दाम पर दुनिया में बेच रही हैं। इससे रूस को यूक्रेन जंग के लिए पैसा मिल रहा है, जबकि भारत मुनाफा कमा रहा है” .
हालांकि, भारत ने इन आरोपों को consistantly खारिज किया है। पिछले हफ्ते ही विदेश मंत्री जयशंकर ने रूस का दौरा करते हुए स्पष्ट किया था कि भारत रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार नहीं है, बल्कि चीन है। भारत का तर्क है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रणनीतिक रूप से जरूरी कदम उठा रहा है।
Region पर असर: टैरिफ युद्ध से बदल सकते हैं अंतरराष्ट्रीय समीकरण
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रम्प की टैरिफ नीति न केवल भारत-अमेरिका संबंधों को प्रभावित करेगी, बल्कि पूरे region के भू-राजनीतिक समीकरणों को बदल सकती है। भारत पर लगाए गए टैरिफ से:
- भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा, खासकर रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल सेक्टर में
- वैश्विक तेल बाजार में उतार-चढ़ाव आ सकता है
- भारत-रूस संबंध और मजबूत हो सकते हैं
- region में अमेरिकी प्रभाव को चुनौती मिल सकती है
शांति की उम्मीद: वेंस ने भारत को बताया महत्वपूर्ण
नवारो ने अपने बयान में एक महत्वपूर्ण बात यह भी कही कि रूस-यूक्रेन जंग की शांति का रास्ता भारत से होकर ही जाता है। इससे स्पष्ट है कि अमेरिका भारत की region में स्थिरता बनाए रखने वाली भूमिका को महत्व देता है।
वेंस ने भी इशारा किया कि अगर रूस के साथ प्रगति होती है तो कुछ देशों पर टैरिफ घटाए जा सकते हैं। जरूरत पड़ी तो और बढ़ाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि अमेरिका यूक्रेन को ऐसी सुरक्षा गारंटी दे रहा है, जिससे दोबारा रूस हमला न कर सके।
आगे की राह: क्या होगा भारत-अमेरिका संबंधों का भविष्य?
ट्रम्प के दावों और टैरिफ नीति ने भारत-अमेरिका संबंधों में एक नया मोड़ ला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि:
- भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों के बीच संतुलन बनाना होगा
- अमेरिका को Region में अपनी रणनीति में भारत की भूमिका को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए
- दोनों देशों के बीच Strategic Dialogue जारी रखना महत्वपूर्ण होगा
- Region में शांति बनाए रखने के लिए भारत-पाकिसतान संबंधों में सुधार जरूरी है
27 अगस्त से लागू होने वाले अतिरिक्त टैरिफ के बाद भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों में नया अध्याय शुरू होगा, जिसकी निगाहें पूरी दुनिया टकटकी लगाकर देख रही है।