Stand Up Comedy | Kunal Kamra News: 25 मार्च 2025 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कुनाल कामरा (Kunal Kamra) एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह है उनका स्टैंड-अप कॉमेडी शो “नया भारत” का हिस्सा रहा गाना “हम होंगे कंगाल”, जिसके बोलों ने न सिर्फ हंसी बिखेरी, बल्कि एक बड़े विवाद को भी जन्म दिया। इस गाने में कुनाल ने मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक हालात पर तीखा व्यंग्य किया, जिसके बाद शिवसेना (शिंदे गुट) के समर्थकों ने मुंबई के खार इलाके में द हैबिटेट स्टूडियो में तोड़फोड़ कर दी। आइए, इस घटना और गाने की पूरी कहानी को विस्तार से जानते हैं, साथ ही इसके पूरे लिरिक्स भी देखते हैं।
विवाद की शुरुआत – Kunal Kamra

Kunal Kamra ने अपने शो में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर तंज कसते हुए “हम होंगे कंगाल” गाना पेश किया। इस गाने के बोलों में अंधविश्वास, बेरोजगारी, हिंसा और राजनीतिक हालात की आलोचना थी। जैसे ही इस शो का एक क्लिप वायरल हुआ, शिवसेना समर्थकों ने इसे अपने नेता के खिलाफ अपमान माना और 24 मार्च 2025 को स्टूडियो में तोड़फोड़ कर अपना गुस्सा जाहिर किया। कुनाल ने इसके जवाब में X पर अपनी प्रतिक्रिया दी और साफ कहा कि वह माफी नहीं मांगेंगे। उन्होंने इसे अभिव्यक्ति की आजादी का मुद्दा बताया और अपने स्टैंड पर अडिग रहे।
X पर प्रतिक्रियाएं
इस घटना के बाद X पर दो धड़ों में बहस छिड़ गई। एक तरफ वह तबका है जो कुनाल कामरा का समर्थन करते हुए उन्हें साहसी बता रहे हैं, जो मौजूदा माहौल में सच बोलने की हिम्मत रखते हैं। वही दूसरी तरफ एक तबका ऐसा भी है जो उनकी आलोचक करते हुए इसे सस्ती लोकप्रियता का हथकंडा और एकतरफा हमला कह रहे हैं।
कुछ यूजर्स ने Kunal Kamra को लेकर हुई तोड़फोड़ की निंदा की, लेकिन गाने को उकसावे वाला भी बताया। बरहाल जो भी हो लेकिन इसने हास्य, सत्ता और आजादी की सीमाओं पर फिर से सवाल तो खड़े ही कर दिए हैं।
“हम होंगे कंगाल” के पूरे लिरिक्स
Kunal Kamra का यह गाना उनके व्यंग्यात्मक अंदाज का बेहतरीन नमूना है। नीचे इसके पूरे बोल दिए जा रहे हैं, जो विवाद का केंद्र बने:
हम होंगे कंगाल एक दिन,
मन में अंधविश्वास, देश का सत्यानाश,
हम होंगे कंगाल एक दिन।
होंगे दंगे चारों ओर,
हाथों में हथियार, चारों ओर बेरोज़गार,
हम होंगे कंगाल एक दिन।
होंगे नंगे चारों ओर,
करेंगे दंगे चारों ओर,
पुलिस के पंगे चारों ओर, एक दिन।
मन में नाथूराम, हरकतें आशाराम,
संघी का प्रचार, देश का बंटाधार,
हम होंगे कंगाल एक दिन।
इन बोलों में कुनाल ने नाथूराम गोडसे और आसाराम बापू जैसे नामों का जिक्र कर धार्मिक कट्टरता और अंधविश्वास पर निशाना साधा, साथ ही बेरोजगारी और हिंसा जैसे सामाजिक मुद्दों को भी उठाया।
कुनाल कामरा का रुख

तोड़फोड़ के बाद Kunal Kamra ने X पर लिखा, “मैं अपने शब्दों पर कायम हूं। कॉमेडी का मतलब सच को हंसी के साथ पेश करना है, और मैं यही करता रहूंगा।” उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी को आपत्ति थी, तो कानूनी रास्ता अपनाना चाहिए था, न कि हिंसा का। उनके इस बयान ने उनके फैंस का हौसला बढ़ाया, लेकिन विरोधियों का गुस्सा और भड़का।
क्या कहता है यह विवाद?
कुनाल कामरा का यह मामला सिर्फ एक कॉमेडियन और राजनीतिक गुट के बीच की लड़ाई नहीं है। यह आज के भारत में अभिव्यक्ति की आजादी, हास्य की सीमाएं और सत्ता के प्रति जवाबदेही जैसे बड़े सवालों को दर्शाता है। क्या हास्य को सेंसर किया जाना चाहिए? क्या असहमति को हिंसा से दबाया जा सकता है? ये सवाल इस घटना के बाद और गहरे हो गए हैं।
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Kunal Kamara के गीत ने साबित किया हास्य और सत्ता का रिश्ता।
का का “हम होंगे कंगाल” गाना और इसके बाद हुई तोड़फोड़ ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारत में हास्य और सत्ता का रिश्ता जटिल है। जहां कुनाल अपने व्यंग्य से लोगों को सोचने पर मजबूर कर रहे हैं, वहीं उनके खिलाफ हिंसा ने यह सवाल उठाया कि क्या हम असहमति को सहने की क्षमता खो रहे हैं। X पर यह बहस अभी थमने वाली नहीं दिखती। आप इस बारे में क्या सोचते हैं? कुनाल कामरा का पक्ष लेते हैं या उनकी आलोचना करते हैं? अपनी राय जरूर साझा करें।
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