महाराष्ट्र राजभवन से दिल्ली सत्ता गलियारे तक का सफर! एनडीए ने उपराष्ट्रपति पद के लिए चुना दक्षिण भारत के दिग्गज नेता और महाराष्ट्र के मौजूदा राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन को। यह ऐलान खुद भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने रविवार को एक ऐतिहासिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया, जिससे राजनीतिक गलियारों में नया इतिहास लिखने की तैयारी शुरू हो गई है।
दक्षिण की धमक! सीपी राधाकृष्णन बनें NDA के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार, 21 अगस्त को दाखिल करेंगे नामांकन
दरअसल, रविवार की दोपहर दिल्ली स्थित संसद भवन के लाइब्रेरी बिल्डिंग में हुई भाजपा संसदीय दल की अहम बैठक में सीपी राधाकृष्णन उपराष्ट्रपति उम्मीदवार के तौर पर एनडीए की ओर से मैदान में उतरेंगे। इस फैसले पर सभी बड़े नेताओं की सर्वसम्मति थी।
इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय मंत्रिमंडल के कई अन्य वरिष्ठ सदस्य मौजूद थे।
खास बात यह रही कि पार्टी अध्यक्ष नड्डा ने बैठक के तुरंत बाद प्रेस को संबोधित करते हुए इस ऐतिहासिक फैसले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि श्री राधाकृष्णन 21 अगस्त को अपना नामांकन दाखिल करेंगे और इस मौके पर एनडीए शासित सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री भी मौजूद रहेंगे, जो इस नामांकन को एकजुटता का प्रतीक बना देगा।
बैठक में क्या हुआ?
सूत्रों के मुताबिक, रविवार की बैठक करीब डेढ़ घंटे तक चली। इसमें उपराष्ट्रपति पद के संभावित उम्मीदवारों पर गहन चर्चा हुई। अंत में सर्वसम्मति से महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन के नाम पर मुहर लगी।
पीएम मोदी ने इस चुनाव को देश की एकता और सुदृढ़ लोकतंत्र के प्रतीक के रूप में बताया। गृहमंत्री शाह ने राधाकृष्णन के लंबे सार्वजनिक जीवन और संगठनात्मक कौशल की सराहना की। यह फैसला सिर्फ एक उम्मीदवार चुनने भर का नहीं, बल्कि एनडीए की ‘दक्षिण भारत की ओर’ रणनीति का एक अहम पड़ाव भी है।
कौन हैं चंद्रपुरम पोन्नुसामी राधाकृष्णन?
सीपी राधाकृष्णन का पूरा नाम चंद्रपुरम पोन्नुसामी राधाकृष्णन है। उनका जन्म 4 मई 1957 को तमिलनाडु के तिरुपुर में हुआ। उनकी राजनीतिक यात्रा बेहद प्रेरणादायक है:
- आरएसएस की मजबूत नींव: महज 16 साल की उम्र में ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ गए थे। यहीं से उनके सामाजिक और राजनीतिक जीवन की नींव पड़ी।
- संसद तक का सफर: वे 1998 और 1999 में लगातार दो बार तमिलनाडु की कोयंबटूर लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। संसद में उनके कामकाज ने उन्हें एक प्रभावी जनप्रतिनिधि के रूप में पहचान दिलाई।
- तमिलनाडु भाजपा की कमान: उन्होंने 2004 से 2007 तक तमिलनाडु भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष का पद संभाला। इस दौरान उन्होंने राज्य में पार्टी को मजबूती देने का काम किया।
- राजभवन का अनुभव: वर्ष 2023 में उन्हें झारखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया। फिर कुछ महीने पहले ही उनका महाराष्ट्र का राज्यपाल के तौर पर तबादला हुआ। राज्यपाल के रूप में उनकी भूमिका को सराहा गया।
दक्षिण से जुड़ाव: एनडीए की बड़ी चाल
राधाकृष्णन के उम्मीदवार बनने को राजनीतिक विश्लेषक एनडीए की एक सोची-समझी रणनीति मान रहे हैं। जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे के बाद, उपराष्ट्रपति पद के लिए एक ऐसे चेहरे की तलाश थी जो अनुभवी भी हो और जिसका दक्षिण भारत में गहरा जुड़ाव भी हो।
राधाकृष्णन तमिलनाडु के मूल निवासी हैं और वहां उनकी पैठ मजबूत है। उनका आरएसएस और भाजपा में लंबा सफर उन्हें संघ के प्रति वफादार नेता के तौर पर स्थापित करता है। यह चुनाव एनडीए के लिए दक्षिण में अपनी पैठ बढ़ाने का एक सुनहरा मौका है।
उपराष्ट्रपति चुनाव: तारीखें और प्रक्रिया
उपराष्ट्रपति के पद के लिए चुनाव प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। जानिए क्या है समयसीमा:
- नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि: 21 अगस्त 2023 (इसी दिन सीपी राधाकृष्णन नामांकन दाखिल करेंगे)।
- उम्मीदवारी वापस लेने की आखिरी तारीख: 25 अगस्त 2023।
- मतदान की तिथि: 9 सितंबर 2023 (राज्यसभा और लोकसभा के सदस्य मतदान करेंगे)।
- मतगणना की तिथि: 9 सितंबर 2023 ही (मतदान के तुरंत बाद गिनती होगी)।
अचानक इस्तीफा: जगदीप धनखड़ का फैसला
इस पूरी प्रक्रिया की शुरुआत हुई थी पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अप्रत्याशित इस्तीफे से। 21 जुलाई की देर रात, 74 वर्षीय धनखड़ ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया, हालांकि उनका कार्यकाल 10 अगस्त 2027 तक चलना था। उनके इस्तीफे के तुरंत बाद से ही उनके उत्तराधिकारी पर चर्चा तेज हो गई थी। धनखड़ के इस्तीफे के बाद उपराष्ट्रपति पद खाली हो गया था, जिसे भरने के लिए यह चुनाव कराए जा रहे हैं। राजनीतिक हलकों में धनखड़ के इस्तीफे के पीछे के कारणों पर अभी भी चर्चा जारी है।
क्या है चुनौतियां?
हालांकि एनडीए के पास संख्याबल में भारी बढ़त है, फिर भी विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया देखना दिलचस्प होगा। क्या वे कोई साझा उम्मीदवार खड़ा कर पाएंगे? इस पर अभी स्पष्टता नहीं है। राधाकृष्णन का आरएसएस और भाजपा से गहरा जुड़ाव विपक्ष के एक तबके को उन पर आरोप लगाने का मौका दे सकता है, हालांकि उनका प्रशासनिक अनुभव और दक्षिण भारतीय पृष्ठभूमि एक संतुलन बनाती है।
अब क्या? आगे की राह…
21 अगस्त का दिन अब बेहद अहम हो गया है। जब सीपी राधाकृष्णन संसद भवन पहुंचकर औपचारिक रूप से उपराष्ट्रपति पद के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगे। इस मौके पर एनडीए गठबंधन के सभी बड़े नेता और राज्यों के मुख्यमंत्री-उपमुख्यमंत्री उपस्थित रहेंगे, जो गठबंधन की एकजुटता का प्रदर्शन करेगा। नामांकन के बाद, अगले कुछ दिन चुनाव प्रचार की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं, हालांकि उपराष्ट्रपति चुनाव में पारंपरिक रूप से व्यापक प्रचार नहीं होता।
मालूम हो, ये चुनाव सिर्फ एक पद भरने तक सीमित नहीं है। यह दक्षिण भारत से आए एक कद्दावर नेता को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने और एनडीए की ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को आगे बढ़ाने का एक सशक्त प्रयास है। 9 सितंबर को जब वोट पड़ेंगे, तब तय होगा कि क्या सीपी राधाकृष्णन देश के अगले उपराष्ट्रपति बनते हैं – लेकिन आज, एनडीए ने जिस आत्मविश्वास के साथ उन्हें मैदान में उतारा है, वह साफ दिखाता है कि वे इस जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं। पूरा देश अब 21 अगस्त और फिर 9 सितंबर की ओर देख रहा है।