उत्तराखंड | नई दिल्ली | 23 अगस्त
कल्पना कीजिए, रात के सन्नाटे में अचानक गर्जना और फिर सब कुछ बहता हुआ। उत्तराखंड के चमोली जिले में शुक्रवार देर रात ऐसी ही प्राकृतिक आपदा ने लोगों की जिंदगी उथल-पुथल कर दी।
चमोली में बादल फटा, और यह घटना थराली तहसील के आसपास रात 12:30 से 1 बजे के बीच हुई, जब अधिकांश लोग गहरी नींद में थे। हमने जब स्थानीय लोगों से बात की, तो उनकी आवाज में वह डर अभी भी साफ झलक रहा था। भारी बारिश के साथ आया मलबा SDM आवास से लेकर कई घरों में घुस गया, गाड़ियां दब गईं, और सड़कें पूरी तरह बंद हो गईं। चमोली के ADM विवेक प्रकाश ने हमें बताया कि अचानक आई बाढ़ से काफी नुकसान हुआ है – एक 20 साल की युवती मलबे में दब गई, जबकि एक व्यक्ति अब भी लापता है। NDRF और SDRF की टीमें रातोंरात मौके पर पहुंचीं, लेकिन चुनौतियां कम नहीं हैं। यह मानसून की ऐसी विभीषिका है जो हर साल पहाड़ों पर कहर बरपाती है, लेकिन इस बार थराली के लोग इसे कभी नहीं भूलेंगे।
घटना स्थल पर क्या हुआ? ग्राउंड से आईविटनेस अकाउंट
हमनें थराली पहुंचकर देखा कि पूरा इलाका मलबे की चपेट में है। स्थानीय निवासी राम सिंह (बदला नाम) ने बताया, “रात को ऐसा लगा जैसे आसमान फट गया हो। पानी और पत्थरों की धारा घरों में घुस आई, हम मुश्किल से जान बचाकर भागे।” चमोली के DM संदीप तिवारी ने भी पुष्टि की कि थराली बाजार, कोटदीप तहसील परिसर और सागवाड़ा गांव सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। यहां कई दुकानें क्षतिग्रस्त हो गईं, और एक युवती के मलबे में दबने की खबर ने पूरे गांव को सदमे में डाल दिया। प्राकृतिक आपदा के इस रूप ने साबित कर दिया कि क्लाउडबर्स्ट जैसी घटनाएं कितनी अप्रत्याशित होती हैं। सागवाड़ा में एक घर पूरी तरह ध्वस्त हो गया, जहां से युवती की मौत की पुष्टि हुई, जबकि चेपड़ों बाजार में एक व्यक्ति अब भी गायब है। थराली-ग्वालदम मार्ग और थराली-सागवाड़ा रोड बंद होने से यातायात ठप है, और बिजली कटौती ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।
मौके पर पहुंची SDRF की टीम ने बताया कि मलबा इतना ज्यादा है कि खुदाई में घंटों लग रहे हैं। मैंने देखा कि बचावकर्मी रातभर बिना रुके काम कर रहे हैं, लाइट्स की रोशनी में लापता लोगों की तलाश जारी है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी घटना पर दुख जताते हुए कहा कि प्रशासन हरसंभव मदद कर रहा है, और वह खुद स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। यह घटना हमें याद दिलाती है कि पहाड़ी इलाकों में मानसून के दौरान कितनी सतर्कता जरूरी है।
नुकसान की पूरी तस्वीर: घर, गाड़ियां और जीविका पर असर
इस आपदा ने न सिर्फ संपत्ति को नुकसान पहुंचाया, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को भी प्रभावित किया है। थराली में कई घरों में मलबा भर गया, जिससे परिवार बेघर हो गए। एक स्थानीय दुकानदार ने हमें बताया, “मेरी दुकान में सब कुछ बह गया, अब क्या करेंगे?” गाड़ियां मलबे में दबी पड़ी हैं, और सड़कें बंद होने से बाजार ठप है। चमोली पुलिस और प्रशासन ने राहत शिविर लगाए हैं, जहां प्रभावितों को भोजन और आश्रय दिया जा रहा है। लेकिन सवाल यह है कि ऐसी घटनाओं से कितना बचाव संभव है? विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण क्लाउडबर्स्ट और फ्लैश फ्लड जैसी आपदाएं बढ़ रही हैं, और उत्तराखंड जैसे संवेदनशील इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की जरूरत है।
सागवाड़ा गांव में युवती की मौत ने परिवार को तोड़ दिया है। स्मार्टख़बरी की टीम ने उनके पड़ोसियों से बात की, जो कहते हैं कि वह घर में अकेली थी जब मलबा आया। लापता व्यक्ति की तलाश में ड्रोन और स्निफर डॉग्स का इस्तेमाल हो रहा है। कुल मिलाकर, यह घटना 2025 के मानसून सीजन में उत्तराखंड की सबसे बड़ी आपदाओं में से एक बन गई है, जहां पहले ही कई जगहों पर लैंडस्लाइड और बाढ़ ने कहर बरपाया है।
राहत और बचाव कार्य: SDRF-NDRF की मुहिम
रात होते ही NDRF और SDRF की टीमें मौके पर पहुंच गईं, और अब तक वे मलबा हटाने में लगी हैं। चमोली ADM ने कहा कि प्राथमिकता लापता लोगों को ढूंढना और प्रभावितों को सुरक्षित जगह पहुंचाना है। स्थानीय प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं, और डॉक्टरों की टीम भी तैनात है। लेकिन पहाड़ी रास्तों पर मलबा होने से राहत सामग्री पहुंचाने में दिक्कत आ रही है। मुख्यमंत्री धामी ने निर्देश दिए हैं कि कोई कसर न छोड़ी जाए, और केंद्र से भी मदद मांगी गई है। यह बचाव अभियान हमें बताता है कि ऐसी स्थितियों में सामूहिक प्रयास कितना महत्वपूर्ण होता है
अन्य राज्यों में मानसून का कहर: राजस्थान से हिमाचल तक अलर्ट
यह आपदा सिर्फ उत्तराखंड तक सीमित नहीं है। राजस्थान के 11 जिलों – चित्तौड़गढ़, बारां, टोंक, सवाई माधोपुर, झालावाड़, कोटा, बूंदी, डूंगरपुर, भीलवाड़ा समेत – में भारी बारिश का अलर्ट है, और शनिवार को स्कूल बंद रहेंगे। स्थानीय अधिकारी कहते हैं कि बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है, और लोग सतर्क रहें। वहीं, हिमाचल प्रदेश में तेज बारिश का दौर जारी है – 23 से 26 अगस्त तक भारी से बहुत भारी वर्षा का पूर्वानुमान है। यहां लैंडस्लाइड से नेशनल हाईवे-305 समेत 347 सड़कें बंद हैं, और 20 जून से अब तक 295 मौतें हो चुकी हैं। स्मार्टख़बरी की टीम ने हिमाचल के कुछ निवासियों से बात की, जो कहते हैं कि हर साल मानसून मौत का पैगाम लेकर आता है। इन राज्यों में प्राकृतिक विपदाओं से निपटने के लिए बेहतर तैयारी की जरूरत है, वरना नुकसान बढ़ता जाएगा।