हैदराबाद/नई दिल्ली, 23 अगस्त: क्या आप जानते हैं कि एक मुख्यमंत्री की संपत्ति इतनी ज्यादा हो सकती है कि पूरे देश के बाकी मुख्यमंत्रियों की कुल दौलत का आधा से ज्यादा हिस्सा अकेले उनके पास हो? आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने हालिया रिपोर्ट में सबको चौंका दिया है, जहां वे भारत के सबसे अमीर मुख्यमंत्री के रूप में उभरे हैं।
हैदराबाद से ग्राउंड रिपोर्ट करते हुए हमने एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और नेशनल इलेक्शन वॉच (NEW) की ताजा रिपोर्ट को खंगाला, जो देश भर के 30 मौजूदा मुख्यमंत्रियों के हलफनामों पर आधारित है।
इस रिपोर्ट से साफ हो गया कि चंद्रबाबू नायडू भारत के सबसे अमीर मुख्यमंत्री हैं, जिनकी कुल संपत्ति 931 करोड़ रुपये से ज्यादा है। यह आंकड़ा पिछले चुनाव से पहले दायर हलफनामों से लिया गया है, और इसमें चल-अचल संपत्ति दोनों शामिल हैं।
देश के सभी 30 मुख्यमंत्रियों की कुल संपत्ति 1632 करोड़ रुपये है, और इसका लगभग 57 फीसदी हिस्सा अकेले नायडू के पास है। यह खुलासा ऐसे समय में आया है, जब राजनीति में पारदर्शिता और संपत्ति घोषणा पर बहस छिड़ी हुई है।
चंद्रबाबू नायडू की संपत्ति का पूरा ब्योरा
चंद्रबाबू नायडू, जो तेलुगु देशम पार्टी के दिग्गज नेता हैं, अपनी संपत्ति के मामले में सबसे आगे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी चल संपत्ति करीब 810 करोड़ रुपये की है, जिसमें कैश, बैंक डिपॉजिट, जेवरात और अन्य निवेश शामिल हैं। वहीं, अचल संपत्ति जैसे मकान, जमीन और प्रॉपर्टी का मूल्य 121 करोड़ रुपये आंका गया है। दिलचस्प बात यह है कि नायडू पर 10 करोड़ रुपये का कर्ज भी है, जो उनके कारोबारी बैकग्राउंड को दर्शाता है।
हमने स्थानीय स्रोतों से बात की तो पता चला कि नायडू का परिवार हेरिटेज फूड्स जैसी कंपनियों से जुड़ा है, जो दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स का बड़ा कारोबार चलाता है। यह संपत्ति न सिर्फ राजनीतिक बल्कि व्यावसायिक सफलता की कहानी बयां करती है। लेकिन सवाल यह है कि क्या इतनी बड़ी दौलत राजनीति में पारदर्शिता को प्रभावित करती है? ADR की रिपोर्ट इस पर रोशनी डालती है, जहां संपत्ति के स्रोतों की जांच की मांग उठ रही है।
अन्य अमीर मुख्यमंत्रियों की लिस्ट में कौन-कौन?
भारत के सबसे अमीर मुख्यमंत्री की सूची में चंद्रबाबू नायडू के बाद दूसरे नंबर पर अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू हैं। उनकी कुल संपत्ति 332 करोड़ रुपये है, जिसमें 165 करोड़ की चल संपत्ति और 167 करोड़ की अचल संपत्ति शामिल है। खांडू पर सबसे ज्यादा कर्ज है – 180 करोड़ रुपये से ज्यादा की देनदारी, जो निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े उनके कारोबार से जुड़ी हो सकती है।
तीसरे स्थान पर कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया हैं, जिनकी संपत्ति 51 करोड़ रुपये है – 21 करोड़ चल और 30 करोड़ अचल। ये आंकड़े दिखाते हैं कि पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के कुछ नेता संपत्ति के मामले में काफी आगे हैं। हमने रिपोर्ट के आधार पर देखा कि औसतन हर मुख्यमंत्री की संपत्ति 52 करोड़ रुपये के आसपास है, लेकिन असमानता साफ नजर आती है। यह राजनीतिक नेतृत्व में आर्थिक अंतर को उजागर करता है, जहां कुछ नेता करोड़पति हैं तो कुछ सादगी की मिसाल।
सबसे कम संपत्ति वाले मुख्यमंत्री: ममता बनर्जी टॉप पर
अगर अमीरों की बात हो रही है तो गरीबों की भी चर्चा जरूरी है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सबसे कम संपत्ति वाली सीएम हैं, जिनके पास सिर्फ 15.38 लाख रुपये की चल संपत्ति है। उनके पास कोई अचल संपत्ति नहीं है, जो उनकी सादगी और जनता से जुड़ाव को दिखाता है।
दूसरे नंबर पर जम्मू-कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला हैं, जिनकी संपत्ति 55.24 लाख रुपये है। तीसरे स्थान पर केरल के पिनाराई विजयन हैं, जिनकी कुल दौलत 1.18 करोड़ रुपये है – 31.8 लाख चल और 86.95 लाख अचल। ये नेता राजनीति को सेवा के रूप में देखते हैं, जहां संपत्ति जमा करने से ज्यादा फोकस जनकल्याण पर है।
ग्राउंड से बात करने पर पता चलता है कि ममता जैसे नेताओं की छवि आम आदमी से जुड़ी रहती है, जो चुनावों में उनका मजबूत पक्ष बनती है। लेकिन क्या यह असमानता लोकतंत्र के लिए चुनौती है? ADR की रिपोर्ट इस पर सोचने को मजबूर करती है।
मुख्यमंत्रियों पर आपराधिक मामले: चौंकाने वाले आंकड़े
संपत्ति के अलावा रिपोर्ट में क्रिमिनल रिकॉर्ड भी खंगाला गया है। देश के 30 मुख्यमंत्रियों में से 12 (40%) पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से 10 (33%) पर गंभीर अपराध जैसे हत्या की कोशिश, अपहरण और रिश्वतखोरी के केस हैं। तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी पर सबसे ज्यादा 89 मामले हैं, जो राजनीतिक विवादों से जुड़े लगते हैं। यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है, जब केंद्र सरकार तीन नए कानून ला रही है, जिनमें गंभीर आरोपों पर 30 दिन की हिरासत में पद से अयोग्यता का प्रावधान है।
हमने ADR के विशेषज्ञों से बात की तो उन्होंने बताया कि यह डेटा चुनाव सुधार के लिए अहम है, क्योंकि मतदाता को नेताओं की पृष्ठभूमि जानने का हक है। राजनीति में अपराधीकरण रोकने के लिए ऐसे विश्लेषण जरूरी हैं, वरना लोकतंत्र की जड़ें कमजोर हो सकती हैं।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ और क्या है आगे का रास्ता?
ADR की यह रिपोर्ट 27 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों के हलफनामों पर आधारित है, जहां मणिपुर में राष्ट्रपति शासन है। विशेषज्ञों का मानना है कि संपत्ति और अपराध के ये आंकड़े चुनावी सुधारों को गति देंगे। लेकिन सवाल उठता है कि क्या अमीर नेता बेहतर शासन देते हैं या गरीब नेता ज्यादा संवेदनशील? यह बहस जारी रहेगी। अगर आप राजनीति के इन पहलुओं पर गहराई से जानना चाहते हैं, तो ADR की वेबसाइट पर जाकर पूरी रिपोर्ट डाउनलोड करें