नई दिल्ली, 29 अगस्त 2025: भारतीय अर्थव्यवस्था पर अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव के बारे में बताते हुए वित्त व्यवस्था के प्रमुख सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने आज कहा कि अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर लगाए गए 50% टैरिफ और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) विकास दर का अनुमान 6.3% से 6.8% के दायरे में बरकरार है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अर्थव्यवस्था का लचीलापन मजबूत घरेलू मांग और नीतिगत सहायता पर आधारित है।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव और आर्थिक स्थिति
अमेरिकी टैरिफ के कारण भारत के निर्यात पर दबाव पड़ा है, विशेष रूप से कपड़ा, गहने, और कृषि उत्पादों जैसे क्षेत्रों में, जिनका अमेरिका को निर्यात मूल्य 48 अरब डॉलर से अधिक है . इन क्षेत्रों में निर्यात मात्रा में 70% तक की गिरावट आने की आशंका है, जिससे वित्त वर्ष 2025-26 में अमेरिका को भारतीय निर्यात 43% तक गिर सकता है . हालांकि, सीईए नागेश्वरन ने बताया कि मजबूत घरेलू मांग और सरकारी नीतियों ने इन बाहरी झटकों के प्रभाव को कम किया है। उन्होंने कहा, “भारत की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से घरेलू उपभोग और निवेश पर आधारित है, जो जीडीपी का लगभग 60% हिस्सा है। यही कारण है कि बाहरी चुनौतियों के बावजूद विकास दर स्थिर बनी हुई है।”
सरकार की रणनीति और नीतिगत उपाय
अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को कम करने के लिए भारत सरकार ने कई कदम उठाए हैं। इनमें 25,000 करोड़ रुपये के निर्यात संवर्धन मिशन, जीएसटी में बदलाव, और मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) पर तेजी से काम करना शामिल है . भारत अमेरिका पर निर्भरता कम करने के लयूरोपीय संघ, ब्रिटेन, और अन्य देशों के साथ व्यापारिक संबंधों को विस्तार दे रहा है . इसके अलावा, कपड़ा जैसे प्रभावित क्षेत्रों के लिए 40 नए बाजारों तक पहुंच बनाने की योजना बनाई गई है, जिनका कुल कपड़ा आयात 590 अरब डॉलर है .
भारतीय अर्थव्यवस्था पर अमेरिकी टैरिफ के बाद वैश्विक संदर्भ और भारत की स्थिति
भारतीय अर्थव्यवस्था पर अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं है। येल विश्वविद्यालय की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी टैरिफ के कारण वहां की अर्थव्यवस्था में दीर्घकालिक रूप से 0.3% की कमी आने का अनुमान है, और बेरोजगारी दर 0.3 प्रतिशत अंक बढ़ सकती है . इसके विपरीत, भारत की अर्थव्यवस्था ने मजबूत प्रदर्शन जारी रखा है, जिसे एसएंडपी जैसी रेटिंग एजेंसियों ने हाल ही में क्रेडिट रेटिंग में सुधार कर मान्यता दी है। नागेश्वरन ने कहा कि भारत की structural strengths, जैसे कि अनुकूल मानसून, कृषि विकास, और सेवा क्षेत्र में मजबूती, विकास को समर्थन दे रही हैं।
भू-राजनीतिक पहलू और भविष्य की दिशा
अमेरिकी टैरिफ को भू-राजनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में भी देखा जा रहा है। अमेरिकी अर्थशास्त्री रिचर्ड वोल्फ जैसे विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की यह कार्रवाई भारत को ब्रिक्स जैसे वैकल्पिक संगठनों के करीब ला सकती है, जो पश्चिमी वित्तीय प्रभुत्व को चुनौती देते हैं। भारत ने इसके जवाब में अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर चर्चा को टैरिफ हटाए जाने के शर्त से जोड़ा है।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर अमेरिकी टैरिफ का सीईए नागेश्वरन की नजर में कितना पड़ेगा प्रभाव?
सीईए नागेश्वरन के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2026 में 6.3-6.8% की विकास दर हासिल करने के लिए तैयार है, जो मजबूत घरेलू आधार, नीतिगत सहायता, और वैश्विक बाजारों में विविधीकरण की रणनीति पर निर्भर करती है। हालांकि टैरिफ के कारण कुछ क्षेत्रों में चुनौतियाँ बनी हुई हैं, लेकिन अर्थव्यवस्था का समग्र ढाँचा लचीला बना हुआ है। भारत की विकास यात्रा में यह अध्याय उसकी आर्थिक सुदृढ़ता और रणनीतिक अनुकूलन क्षमता को उजागर करता है।