नई दिल्ली/जम्मू & कश्मीर/हिमाचल प्रदेश, 26 अगस्त: कल्पना कीजिए, पवित्र वैष्णो देवी की यात्रा पर निकले श्रद्धालु अचानक पहाड़ से गिरते पत्थरों की चपेट में आ जाएं, और पूरी यात्रा मौत की घाटी बन जाए। जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में लगातार तीन दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश ने ऐसा ही कहर बरपाया है, जहां लैंडस्लाइड, क्लाउड बर्स्ट और बाढ़ ने दर्जनों जानें लीं और हजारों को बेघर कर दिया।
जम्मू कश्मीर हिमाचल बाढ़ लैंडस्लाइड की ये घटनाएं अब पूरे देश को हिला रही हैं, क्योंकि मौसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी किया है और आगे भी भारी वर्षा की चेतावनी दी है। हमने प्रभावित इलाकों के लोगों से बात की और सरकारी रिपोर्ट्स का विश्लेषण किया, तो पता चला कि वैष्णो देवी के अर्धकुमारी इलाके में लैंडस्लाइड से 6 लोग मारे गए हैं, जबकि 14 घायल होकर कम्युनिटी हेल्थ सेंटर कटरा में भर्ती हैं।
हादसे के बाद पूरी यात्रा स्थगित कर दी गई है, और रेस्क्यू टीम्स दिन-रात काम कर रही हैं। जम्मू में तवी नदी के पास सड़क धंसने से कई गाड़ियां गिर गईं, और पुलिस ने तुरंत बचाव अभियान शुरू किया, हालांकि अभी मौतों या नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।
वैष्णो देवी मार्ग पर लैंडस्लाइड
वैष्णो देवी श्राइन जाने वाले पुराने ट्रैक पर ये हादसा हुआ, जहां भारी बारिश से पहाड़ी दरक गई। PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, 6 लोग अपनी जान गंवा बैठे, जबकि 14 को चोटें आईं। घायलों को कटरा के स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि कुछ की हालत गंभीर है। प्रत्यक्षदर्शियों ने फोन पर बताया कि अचानक पत्थर गिरने शुरू हुए, और लोग चीखते-चिल्लाते भागे। श्राइन बोर्ड ने यात्रा रोक दी है, और नए ट्रैक पर भी सतर्कता बढ़ा दी गई है।
जम्मू कश्मीर हिमाचल बाढ़ लैंडस्लाइड जैसे हादसों में अक्सर देखा जाता है कि बारिश के मौसम में पर्यटक और स्थानीय दोनों खतरे में पड़ जाते हैं। पिछले साल भी इसी इलाके में ऐसी घटनाएं हुईं, लेकिन इस बार तीव्रता ज्यादा है। रेस्क्यू ऑपरेशन में NDRF की टीमें लगी हैं, और श्रद्धालुओं को सलाह दी गई है कि मौसम सुधरने तक यात्रा टालें।
डोडा में क्लाउड बर्स्ट ने मचाई तबाही
जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में मंगलवार को क्लाउड बर्स्ट से अचानक बाढ़ आ गई, जिसमें 4 लोगों की मौत हो गई और 10-15 घर बह गए। पिछले 24 घंटों में यहां 4 मौतें दर्ज की गईं, हालांकि इलाके स्पष्ट नहीं हैं। भारी बारिश से पुल और सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं, और कई जगह नेटवर्क डाउन होने से लोग अपनों से संपर्क नहीं कर पा रहे।
स्थानीय निवासी राहिला बानो ने बताया कि उनका घर पूरी तरह डूब गया, और परिवार अब खुले आसमान तले है। डोडा, कठुआ और किश्तवाड़ जैसे जिलों में ये समस्या आम है, जहां पहाड़ी इलाकों में क्लाउड बर्स्ट से फ्लैश फ्लड्स आते हैं।
सरकार ने स्कूल दो दिनों के लिए बंद कर दिए हैं, और जम्मू-श्रीनगर नैशनल हाईवे समेत कई रोड्स बंद हैं। मौसम विभाग का कहना है कि अगले 48 घंटों में और वर्षा हो सकती है, जिससे स्थिति बिगड़ सकती है।
हिमाचल के कुल्लू-मनाली में ब्यास नदी का प्रकोप
हिमाचल प्रदेश भी इस बारिश से अछूता नहीं रहा। कुल्लू और मनाली में ब्यास नदी उफान पर है, जहां 20 से ज्यादा घर, दुकानें और रेस्टोरेंट बह गए। नदी के किनारे बने 30 से अधिक घर खतरे में हैं, और कुल्लू-मनाली रोड का एक हिस्सा पूरी तरह धंस गया, जिससे मनाली का कुल्लू से संपर्क कट चुका है।
हमने लोकल टूर ऑपरेटर्स से बात की, तो पता चला कि पर्यटन सीजन में ये बड़ा झटका है। कई होटल्स पानी में डूबे हैं, और सड़कें बंद होने से सैलानी फंसे हुए हैं। क्लाउड बर्स्ट से मालाना खड में भी फ्लैश फ्लड्स आए, जिससे नुकसान बढ़ा। हिमाचल में ऐसे हादसे मानसून में आम हैं, लेकिन इस साल की बारिश रेकॉर्ड तोड़ रही है। सरकार ने रेस्क्यू के लिए सेना की मदद ली है, और प्रभावितों को राहत सामग्री बांटी जा रही है।
ट्रेन सेवाएं प्रभावित, यातायात ठप
खराब मौसम ने रेल यातायात को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। जम्मू-कश्मीर में 18 ट्रेनें कैंसल कर दी गईं, जबकि 4 ट्रेनों की यात्रा जम्मू पहुंचने से पहले ही रोक दी गई। इनमें कटरा-नई दिल्ली वंदे भारत और श्री शक्ति एक्सप्रेस जैसी प्रमुख ट्रेनें शामिल हैं। सड़क धंसने और फ्लैश फ्लड्स से पठानकोट-कंद्रोरी सेक्शन प्रभावित है, जिससे कई पैसेंजर ट्रेनें रद्द हैं। यात्री स्टेशनों पर फंसे हैं, और रेलवे ने सेफ्टी को प्राथमिकता देते हुए ये फैसला लिया। जम्मू-कश्मीर में नेटवर्क इश्यू से लोग इंटरनेट और कॉलिंग नहीं कर पा रहे, जिससे पैनिक बढ़ा है।
मौसम का पूर्वानुमान और राहत कार्य
मौसम विभाग ने जम्मू-कश्मीर और हिमाचल में अगले दो दिनों तक भारी बारिश की चेतावनी दी है, जिससे लैंडस्लाइड और बाढ़ का खतरा बना हुआ है। मुख्यमंत्री ओमार अब्दुल्लाह ने प्रभावित इलाकों का दौरा किया और राहत के निर्देश दिए और स्थानीय प्रशासन मिलकर रेस्क्यू कर रहे हैं, लेकिन पहाड़ी इलाकों में पहुंचना मुश्किल है। विशेषज्ञों का कहना है कि क्लाइमेट चेंज से ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं, और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की जरूरत है।