विधानसभा में हट्टी गोल्ड माइंस मजदूरों के लिए अस्पताल नदारद, स्पीकर ने तुरंत हाई-एंड एंबुलेंस सेवा का दिया आदेश

विधानसभा में हट्टी गोल्ड माइंस मजदूरों के लिए अस्पताल की कमी का मुद्दा उठा, स्पीकर ने हाई-एंड एंबुलेंस सेवा का दिया आदेश


बेंगलुरु, 12 मार्च। कर्नाटक विधानसभा में गुरुवार को रायचूर जिले की हट्टी गोल्ड माइंस में काम करने वाले मजदूरों के लिए आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया गया। भाजपा विधायक मन्नप्पा डी. वज्जल ने सरकार से क्षेत्र में अस्पताल स्थापित करने की मांग की।

लिंगसुगुर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले वज्जल ने सदन में कहा कि हट्टी गोल्ड माइंस में करीब 6,000 मजदूर काम करते हैं और वे दिन-रात भूमिगत काम करते हैं, लेकिन मेडिकल इमरजेंसी जैसे हार्ट अटैक की स्थिति में इलाज के लिए 100 किलोमीटर के दायरे में एक भी अस्पताल नहीं है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी ने मजदूरों के लिए बेलगावी और बेंगलुरु में अस्पताल की व्यवस्था की है, जिससे इलाज के लिए मजदूरों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। उन्होंने कहा, “हार्ट अटैक के मामलों में मजदूरों को करीब 100 किलोमीटर तक जाना पड़ता है और इलाज में देरी के कारण कई लोगों की रास्ते में ही मौत हो जाती है।”

वज्जल ने कहा कि मेडिकल सुविधाओं की कमी का असर केवल मजदूरों पर ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों के लोगों पर भी पड़ रहा है।

उन्होंने हाल ही की एक घटना का जिक्र किया, जिसमें हट्टी गोल्ड माइंस के कन्वेंशन सेंटर में एक वाल्मीकि संत को हार्ट अटैक आया था। विधायक के अनुसार उस समय वहां न तो डॉक्टर मौजूद थे और न ही बुनियादी दवाइयां उपलब्ध थीं। संत को पहले इलाज के लिए रायचूर ले जाया गया और बाद में बेहतर इलाज के लिए हैदराबाद भेजा गया।

उन्होंने कहा, “स्थिति इतनी गंभीर है कि बुनियादी चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। सौभाग्य से हैदराबाद ले जाने के बाद संत की जान बच गई।”

वज्जल ने आगे कहा कि हट्टी गोल्ड माइंस हर साल लगभग 1,000 करोड़ रुपये का राजस्व उत्पन्न करती है और यह देश को सोना उपलब्ध कराने वाली एकमात्र कंपनी है। उन्होंने कहा कि यदि कंपनी खुद अस्पताल बनाने के लिए संसाधन आवंटित करे तो सरकार को अतिरिक्त खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

उन्होंने कहा, “पैसे की कोई कमी नहीं है। वहां नालों के निर्माण के लिए हजारों करोड़ के टेंडर जारी किए जाते हैं। क्या मजदूरों के लिए एक अस्पताल नहीं बनाया जा सकता?”

मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए चिकित्सा शिक्षा, कौशल विकास, उद्यमिता और आजीविका मंत्री शरण प्रकाश पाटिल ने कहा कि सरकार हर जिले में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि तालुक स्तर पर पूर्ण विकसित कार्डियक सेंटर स्थापित करना व्यावहारिक नहीं हो सकता, क्योंकि कार्डियोलॉजिस्ट जैसे विशेषज्ञ छोटे शहरों में बसने में कठिनाई महसूस कर सकते हैं।

पाटिल ने कहा, “यदि कार्डियक सेंटर स्थापित करना है तो इसके लिए विशेषज्ञ और बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होती है। तालुक स्तर पर सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल स्थापित करना टिकाऊ नहीं हो सकता, लेकिन मेडिकल स्पेशियलिटी अस्पताल पर विचार किया जा सकता है।”

उन्होंने कहा कि वह हट्टी गोल्ड माइंस कंपनी के अध्यक्ष से इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे और क्षेत्र में चिकित्सा सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए फंड आवंटन की संभावना पर विचार करेंगे।

इस पर वज्जल ने कहा कि मामला गंभीर है और इस पर तुरंत कार्रवाई की जरूरत है, क्योंकि लिंगसुगुर तालुक में खनन गतिविधियों के कारण बड़ी संख्या में मजदूर काम करते हैं।

उन्होंने कहा, “यह गंभीर मुद्दा है और सरकार को केवल एक आदेश जारी करने की जरूरत है। अन्य तालुकों की स्थिति अलग हो सकती है, लेकिन लिंगसुगुर में हट्टी गोल्ड माइंस है और यहां हजारों मजदूर काम करते हैं।”

पाटिल ने जवाब में कहा कि हट्टी गोल्ड माइंस कंपनी स्वतंत्र रूप से काम करती है और वह इस मुद्दे पर उसके प्रबंधन से चर्चा करेंगे।

चर्चा के दौरान विधानसभा अध्यक्ष यू.टी. खादर ने हस्तक्षेप करते हुए मंत्री को निर्देश दिया कि खदान स्थल पर मजदूरों के लिए आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं से लैस हाई-एंड एंबुलेंस सेवा तुरंत उपलब्ध कराई जाए।
 

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