कमलप्रीत कौर: किसान पिता के सपोर्ट से चुनौतियों को मात दी, हर महिला एथलीट के लिए बनी मिसाल

किसान पिता का मिला सपोर्ट, चुनौतियों का किया डटकर सामना, हर महिला एथलीट के लिए मिसाल हैं कमलप्रीत कौर


नई दिल्ली, 3 मार्च। टोक्यो ओलंपिक 2020 में डिस्कस थ्रो के खेल में एक नाम खूब चमका था और वो नाम था कमलप्रीत कौर। कमलप्रीत ने ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल में अपनी जगह बनाई थी। 64 मीटर का थ्रो फेंकते हुए कमलप्रीत ने फाइनल में अपनी जगह बनाई थी। वह डिस्कस थ्रो के खेल में फाइनल तक पहुंचने वालीं पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनी थीं। हालांकि, कमलप्रीत का सफर काफी चुनौतियों से भरा रहा।

कमलप्रीत का बचपन से ही खेलों के प्रति खास लगाव था। वह स्कूल स्तर पर होने वाली प्रतियोगिताओं में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती थीं। लगातार अच्छा प्रदर्शन करने की वजह से उनकी प्रतिभा निखरती रही। हालांकि, घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी और कमलप्रीत की मां नहीं चाहती थीं कि वह खेलकूद में हिस्सा लें। हालांकि, कमलप्रीत को पेशे से किसान पिता कुलदीप सिंह का उन्हें पूरा सपोर्ट मिला। कमलप्रीत शुरुआत में गोला फेंक के खेल में अपनी किस्मत आजमाना चाहती थीं। हालांकि, साई केंद्र से जुड़ने के बाद उन्होंने डिस्कस थ्रो में करियर बनाने का फैसला लिया।

इसके बाद कमलप्रीत ने जिला स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू किया और उनका खेल लगातार निखरता गया। साल 2013 में कमलप्रीत ने अंडर-18 नेशनल चैंपियनशिप में हिस्सा लिया और वह दूसरे नंबर पर रहीं। स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया से जुड़ने के बाद कमलप्रीत अगले ही साल जूनियर चैंपियन बनीं। साल 2016 में कमलप्रीत ने पहला राष्ट्रीय खिताब जीता। कमलप्रीत ने 65.06 मीटर का थ्रो फेंकते हुए नेशनल रिकॉर्ड तोड़ा।

कमलप्रीत ने कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियाई टूर्नामेंट्स में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया है। कमलप्रीत के प्रदर्शन ने यह साबित किया कि भारतीय महिला खिलाड़ी भी ट्रैक एंड फील्ड के इवेंट्स में विश्व स्तर पर मुकाबला कर सकती हैं। उनकी मेहनत, आत्मविश्वास और निरंतर अभ्यास ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रतिस्पर्धी बनाया।

कोरोना काल में एक समय ऐसा भी आया कि कमलप्रीत डिप्रेशन की तरफ बढ़ने लगीं और इससे बचने के लिए उन्होंने गांव में ही क्रिकेट खेलना तक शुरू कर दिया। टोक्यो ओलंपिक 2020 में दमदार प्रदर्शन के बूते कमलप्रीत ने विश्व स्तर अपनी पहचान बनाई और उन्होंने देश की तमाम लड़कियों के लिए मिसाल पेश की। वह यह संदेश देती हैं कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो किसी भी मुकाम को हासिल किया जा सकता है।
 

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